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गुणवत्‍ता एवं सुरक्षा

जिपमेर गुणवत्‍ता का परियच (जेक्‍यूसी)

 

रोगी सुरक्षा का मतलब है स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल प्राप्‍त होते समय रोगियों की हानि से बचाव। स्‍वास्थ्‍य देखभाल के दौरान की गयी चिकित्‍सा त्रुटियों रूणता एवं मृत्‍यु का एक मुख्‍य कारण हैं। चिकित्‍सा त्रृटियों के परिणाम स्‍वरूप है अस्‍पताल भर्ती की अतिरिक्‍त लागत, मुकदमा, अस्‍पतालिक रोग संक्रमण, आय में नुकसान एवं विकलांगता। इसके अलावा जनता और स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों के बीच सन्‍तोष, और भरोसे में कमी होती है। इसलिए रोगी की उच्‍च कोटी गुणवत्‍ता का प्रथम मापदण्ड होना चाहिए।

 

जेक्‍यूसी का इति‍हास 

 

अगस्‍त 2012 में हमारे निदेशक डॉ. टी.एस. रविकुमार के सूत्रपात एवं नेतृत्‍व में जिपमेर के सभी विभागों एवं प्रभागों में कार्यरत कर्मचारियों में से एक-एक सदस्‍य  नामित करके एक नूतन मल्‍टीडिसि‍प्लिनरी टीम का गठन किया गया। इस टीम को  जिपमेर में रोगी सुरक्षा एवं गुणवत्‍ता कार्य में सुधार लाने की दिशा में कार्यभार दिया गया। सभी विभागों एवं प्रभागों से करीब सत्‍तर सदस्‍यों को नामित किया गया। प्रारंभिक कदम के रूप में दि. 20 अक्‍तूबर 2012 में आंतरिक एवं बाह्य संकाय विशेषज्ञों द्वारा इन सदस्‍यों को आंतरिक सी.एम.ई. एवं कार्यशाला में प्रशिक्षित किया गया। प्रारंभिक अभिविन्‍यास एवं सी.एम.ई. कार्यशाला का प्रशिक्षण के पश्‍चात् उसी दिन निदेशक द्वारा जिपमेर गुणवत्‍ता परिषद (जेक्‍यूसी) का गठन किया गया।

 

जेक्‍यूसी का कार्यकलाप

 

जेक्‍यूसी के सदस्‍यों को जिपमेर गुणवत्‍ता पार्षदों का पद दिया गया है। ये गुणवत्‍ता पार्षद रोगी सुरक्षा चैंपियन के रूप में कार्य करेंगे और केन्‍द्रक व्‍यक्तियों के रूप में उनके विभाग एवं प्रभाग में कार्यरत स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ताओं को रागी सुरक्षा के बारे में शिक्षा जानकारी प्रदान करेंगे। ये पार्षद नियमित रूप से इन्‍टªk ग्रूप एवं इंटर ग्रूप परिचर्चा/ बैठकों के माध्‍यम से जिपमेर रोगी सुरक्षा से संबंधित विभिन्‍न मुद्धों का समाधान करेंगे। हर महीने जेक्‍यूसी के सदस्‍य डेलिवरबल्‍स का कार्यान्‍वयन भी करेंगे। सब हर महीने आयोजित किये गये जेक्‍यूसी के मासिक बैठक में प्रति-पुष्टि के बारे में चर्चा भी करेंगे। यह एक पी.डी.एस.ए. (प्‍लान टु स्‍टडी एक्‍ट) साइकल के संशोधित रूपान्‍तर गुणवत्‍ता सुधार के लिए उपयोग किया जाता है। बाई-डॉयरेक्‍शनल रेपिड साइक्‍ल लर्निंग मॉडल याने.. ‘’अंतिम प्रयोकता तक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए प्रशिक्षक को प्रशिक्षण दें‘’ तथा हर स्‍तर तक प्रति-पुष्टि प्राप्‍त किया जाये और जिपमेर के हर एक स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों को शिक्षित करवाने के लिए उपयोग किया जाएगा।

 

बारह केन्‍द्रबिन्‍दु क्षेत्र बनाये गये हैं और हर एक केन्‍द्रबिन्‍दु क्षेत्र में एक ग्रूप सुसाध्‍यक/नेता एवं सदस्‍य शामिल होंगे। जे.क्‍यू.सी. के हर एक सदस्‍य किसी एक समय पर दो ग्रपों में काम करेंगे।

 

http://www.jipmer.edu.in/ हमारे बारे में/गुणवत्‍ता एवं सुरक्षा/ जिपमेर गुणवत्‍ता परिषद/  

जिपमेर गुणवत्‍ता परीषद

 

जेक्‍यूसी के बैठक निदेशक की अध्‍यक्षता में हर महीने में आयोजित की जाएगी और   इस बैठक में पिछले महीने में किये गये क्रियाकलापों पर चर्चा करके और आगामी महीने में किये जाने वाले क्रियाकलापों को सुनिश्चित कर विचार किया जाएगा। ग्रूप नेता अन्‍य सदस्‍यों की जानकारी के लिए अपने ग्रूप के क्रियाकलापों का प्रस्तुतीकरण के साथ–साथ दूसरे ग्रूप से प्रति–पुष्टि एवं आलोचनात्‍मक मूल्‍यांकन भी अन्‍य सदस्‍यों प्राप्‍त करेंगे।

 

कार्यान्‍वयन का चरण इस प्रकार होगा:- पणधारी की नियुक्ति, बहु-प्रयोजनीय ढांचे का निर्माण (उदाहरणार्थ:- तल से आधारित सहयोग सहगन, पुनर्संरचना चिकित्‍सालय भूमिका/स्‍वामित्‍व की वृद्धि), पुन:रूपांकन प्रक्रिया गति (उदाहरणार्थ :- समवर्ती बहु-प्रयोजनीय गोल), व्‍यापार का उचित उपकरण का प्रयोग करना। विभिन्‍न स्‍तरीय स्‍वास्‍थ्‍य देखरेख कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए मानव अभिकर्ता अभियांत्रिक के संपूर्ण बहु–प्रयोजनीय दल का संघटण।

 

उपयोग में लाए उचित उपकरण जैसे :- मल्‍टी डिसिप्लिनरी रउन्डिंग टूल, हेन्‍ड ऑफ टूल (बिटवीन शिफ्टस एन्‍ड हॉस्पिटल डामॉइन्‍स), बेड साइड क्लिनिकल निर्णय सपोर्ट डिवाइस तथा प्रक्रियाओं के लिए स्टिमुलेटर्स तथा सॉइकोलॉजिक सिनारइओस। देखरेख की प्रक्रिया का विकास इस प्रकार है- स्ट्रक्‍चर्ड रउन्‍डस, चेक-लिस्टस, केयर पैथवेयस, इन्‍टर डिसिप्लिनरी प्रॉटोकॉल (उदा:- Åपर जठरान्‍त्र आमाशिय रक्‍त स्राव) तथा स्‍कोरिंग सिस्‍टमस। एनलिटिक्‍स का उपयोग इस प्रकार किया जाता है – डिप्‍पार्टमेन्‍टल मार्बिडिटी एवं मॉरटॉलिटीज रिव्‍यूज (मूल कारण विश्‍लेषण नमूनों के साथ) मॉरटॉलिटिस के लिए हॉस्पिटल की समीक्षा निअर मिस्‍अस, प्रतिकूल घटनाएं, प्रहरी घटनाएं तथा नेवअर एवन्‍ट़्स। डिवाइनिंग व रिपोर्टिंग एडर्वेस इवन्‍ट़्स के लिए सामान्‍य प्रारूप विकसित किया जाएगा। इन्‍ट्रा इन्स्टिट्यूशनल ब्‍लेम फ्री रीअल टाइम इलेक्‍ट्रानिक एरर रिपोर्टिंग सिस्‍टम को सॉफ्टवेयर डिसाइनिंग विशेषज्ञों की सहयोग से विकसित किया जाएगा। हॉस्पिटल वाइस इवेन्‍ट्स के लिए डि-आइडेन्टिफाइड डेटा बेस एवं ग्‍लोसरी ऑफ रिपोर्ट मेडिकल एरर के लिए राष्‍ट्रीय स्‍तर के दिशा निर्देशन का प्रतिपादित किया जाएगा।

उद्देश्‍य

(1)   जिपमेर में रोगी सुरक्षा केन्द्रित प्रभाव क्षेत्र को कार्यान्‍वयन कर चिकित्‍सालय गुणवत्‍ता का निदर्शनात्‍मक विकास।

(2)   जिपमेर में रोगी सुरक्षा की सुधार के सामान्‍य अंगीकरण के लिए की पेरफॉमन्‍स इन्डिकेटार्स (के.पी.आई.एस.) के प्रारूप तैयार करना।

(3)   रोगी सुरक्षा के सुधार के लिए देशी एवं लागत प्रभावित प्रौद्योगिकी उपकरणों को विकसित करना।

(4)   देशीय एवं क्षेत्रीय स्‍तर पर रोगी सुरक्षा एवं गुणवत्‍ता की एकीकृत प्रतिरूप बनाने में मुख्‍य भूमिका निभाना है और स्‍वास्‍थ्‍य देखरेख गुणवत्‍ता की नेतृत्‍व प्रशिक्षण एवं रोगी सुरक्षा संस्‍थान के रूप में विकसित करना।

 

जिपमेर गुणवत्‍ता परिषद की संरचना (जेक्‍यूसी)

 

स्‍थापना अध्‍यक्ष/ अध्यक्ष

डॉ. टी.एस. रविकुमार, निदेशक, जिपमेर।

सदस्‍य सचिव एवं ग्रूप समन्‍वयक

डॉ. मुरूगानन्‍दम. के., सहायक आचार्य, यूरोलॉजी, जिपमेर।


 

समन्‍वयन समिति

  1. डॉ. अनिता रस्‍तोगी, डी.एम.एस. जिपमेर ।
  2. डॉ. गीतांजली, आचार्य, भेषजगुण विज्ञान ।
  3. डॉ. मुरूगानन्‍दम. के., सहायक आचार्य, यूरोलॉजी।
  4. श्रीमती. वसन्‍ता, नर्सिंग अधीक्षक, जिपमेर।
  5. श्री. जी. मणि, वित्‍त अधिकारी, जिपमेर

 

जिपमेर गुणवत्‍ता परिषद के सदस्‍य (ग्रूप 1 से 6 के सदस्‍यों ने पुन: सम्मिलित होकर ग्रूप 7 से ग्रूप 12 का कार्यभार निभायेंगें, जेक्‍यूसी के हरेक सदस्‍य एक ही समय में दो ग्रूपों में काम करेंगे।

 

ग्रूप–1                     

नोसोकॉमिनल संक्रमण     

डॉ. राखी, सूक्ष्‍मजीव विज्ञान

डॉ. देवी प्रसाद मोहपात्रा,

संधान शल्‍य चिकित्‍सा।

डॉ. बी.वी. साईचन्‍द्रन, सी.टी.वी.एस.।

डॉ. मुरली पोडुवाल,

अस्थि रोग विज्ञान।

डॉ. जयप्रकाश साहू, अंत:स्राविकी।

डॉ. नारायणन. पी., बालचिकित्‍सा।

डॉ. मुरूगानन्‍दम.के., यूरोलॉजी।

श्रीमती. एस. सुष्‍या, तकनीशियन,

विकृति विज्ञान।

श्री.के. अल्लिमुत्‍तु, तकनीशियन,

सूक्ष्‍मजीव विज्ञान।

कोमती. एस., नर्सिंग, वार्ड-46.

 

ग्रप-2

औषध प्रयोग

आचार्य गीतांजलीभेषजगुण विज्ञान

डॉ.एस. मणिकंठन, भेषजगुण विज्ञान।

डॉ. बिश्‍वजित दुभाषी, चिकित्‍सा अर्बुद विज्ञान।

डॉ. वैभव वाडवेकर, तंत्रिका विज्ञान।

डॉ. रवि फिलिप राजकुमार, मनोचिकित्‍सा।

डॉ. रेश्‍मी कुमारी, त्‍वचा विज्ञान।

डॉ. चणवीरप्‍पा बम्मिकट्टी,   कायचिकित्‍सा।

डॉ. केशवन, भेषजगुण विज्ञान।

श्री. सरवणन, तकनीशियन, डायालिसिस।

डेइसी. डी. नर्सिंग, आई.सी.यू.-32.

 

ग्रूप – 3

.एम.एस.डी.

डॉ. नन्‍द किशोर,शल्‍य चिकित्‍सा।

डॉ. एम.एस. गोपालकृष्‍णन,

तंत्रिका शल्‍य चिकित्‍सा।

डॉ. सत्‍यन परिडा, संवेदनाहरण विज्ञान।

डॉ. बिबेकानंद जिन्‍दाल, बाल शल्‍य चिकित्‍सा।

डॉ. मन्‍जु, पल्‍मोनरी मेडिसिन।

 

ग्रूप – 4

प्रत्‍यापन

डॉप्रतुल सिन्‍हाब्‍लड बैंक।

डॉ. सरसु जयरामन,

शरीररचना विज्ञान।

डॉ. बी. कृष्‍णन, दन्‍त चिकित्‍सा।

डॉ. पी.वीणा, प्रसूति व स्‍त्रीरोग विज्ञान।

डॉ. अरविन्‍द रामकुमार, शल्‍यक अर्बुद विज्ञान।

डॉ. के. रमेश बाबू, नेत्र रोग विज्ञान।

शिवरंजनी.के. नर्सिंग, ई.एम.एस.डी.।

श्री. दिनकरन, नर्सिंग, जठरान्‍त्र ओ.टी.

श्री. सेन्‍गुटटुवन, तकनीशियन, विकृति विज्ञान।

श्रीमती. वी. चि‍त्रलेखा, समाज कल्‍याण अधिकारी।

 

ग्रूप -5

आग सुरक्षा/महा विपदा प्रबन्‍धन 

डॉ.श्‍याम प्रेमविकिरण चिकत्‍सा।

डॉ. धनपथी .एच., नाभिकीय चिकित्‍सा।

डॉ. दीपक भारती, विकिरण विज्ञान।

डॉ. स्‍वरूप, पी.एस.एम.।

डॉ. जी.एस. गौड़, शरीर क्रिया विज्ञान।

डॉ. अनिता रस्‍तोगी, प्रभारी,   एम.आर.डी.।

श्री. के. सरवाणन, लेक्‍चरर, विकिरण चिकित्‍सा।

श्री. रामकुमार, (प्रभारी- सभागार)।

डॉ. विजयप्रभु, विकिरण चिकित्‍सा।

श्री. के. आनन्‍द, नर्सिग, प्रतिरोप-आई.सी.यू.

श्री. राजसेखर, तकनीशियन,

विकिरण विज्ञान।

श्री. एस. गोपालकृष्‍णन, तकनीशियन, जीवीरसायन विज्ञान।

श्री. चिन्‍नप्‍पराज, भण्‍डार अधिकारी।

डॉ. राखी कर, विकृति विज्ञान।

डॉ. बिजु. पी., शल्‍यक अर्बुद विज्ञान।

श्रीमती. वनिता, नर्सिंग यूरोलॉजी ओ.टी.।

श्री. सुन्‍दर मूर्ति, तकनीकशयन,

विकृति विज्ञान।

श्री. मुत्‍तु कुमारसामी, एम.आर.डी.

श्री. वेंकटरामन. ए., तकनीशियन, जीवरसायन विज्ञान।

 

ग्रूप – 6

कार्य स्‍थान /कार्यदल की सुरक्षा।

डॉ. लक्ष्‍मी .पीचिकित्‍सा जठरान्‍त्र विज्ञान।

 

डॉ. अरूण अलेक्‍सान्‍डर, ई.एन.टी.

डॉ. सन्‍तोश सतीश, हृदयरोग विज्ञान।

डॉ. श्रीजित.पी, वृक्‍क विज्ञान।

डॉ. के.के. शहा, विधि चिकित्‍सा।

डॉ. दासरी पापा, प्रसूति एवं स्‍त्री रोग विज्ञान।

डॉ. मेधा. आर, जीवरसायन विज्ञान।

श्रीमती. एन्‍जलिन मेरी शीला, नर्सिंग महाविद्यालय।

श्री. ज्ञानसेखर, तकनीशियन,ब्‍लड बैंक।

कु. कैथरिन, नर्सिंग, ई.एम.एस.डी.

कु. दुर्गादेवी. टी., तकनीशियन, जीवरसायन विज्ञान।

 

ग्रूप - 7

अनन्‍त घटना

डॉ. नारायणन,बाल चिकित्‍सा।

डॉ. वीणा, प्रसूति एवं स्‍त्री रोग विज्ञान।

डॉ. चनवीरप्‍पा बम्मिगट्टी, कायचिकित्‍सा।

डॉ. बी.वी. साई चन्‍द्रन, सी.टी.वी.एस.।

डॉ. नन्‍द किशोर, शल्‍य चिकित्‍सा।

डॉ. एम.एस. गोपालकृष्‍णन,

तंत्रिका शल्‍य चिकित्‍सा।

डॉ. मेधा. आर, जीवरसायन विज्ञान।

श्री. सुन्‍दर मूर्ति, तकनीशियन,

विकृति विज्ञान।

श्री. राजसेखर , तकनीशियन,

विकिरण विज्ञान।

कु. वनिता, नर्सिंग, यूरोलॉजी, ओ.टी.

 

ग्रूप-9

एस.ओ.पी./चेकलिस्ट/संचारन

डॉ. बिजु .पी, शल्यक अर्बुदविज्ञान।

डॉ. वैभव वॉडवेकर, तंत्रिका विज्ञान।

डॉ. लक्ष्मी .सी.पी., चिकित्सा जठरान्त्र रोग विज्ञान।

डॉ. मन्जु, पल्मोनरी मेडिसिन।

डॉ. रेश्मी कुमारी, त्वचा विज्ञान।

डॉ. श्यामा प्रेम, विकिरन चिकित्सा।

डॉ. मुरूगानन्दम .के, यूरोलॉजी।

श्री.के. आनन्द, नर्सिंग, प्रतिरोप-आई.सी.यू.।

मुत्तुकुमारसामी, एम.आर.डी.।

श्रीमती एन्जलिन मेरी शीला, नर्सिंग महाविद्यालय।

कु. दुर्गादेवी .टी., तकनीशियन, जीव रसायन विज्ञान।

ग्रूप-8

शल्य चिकित्सा कक्ष सुरक्षा

डॉ. मुरली पोडुवॉल, अस्थि रोग विज्ञान।

डॉ. सत्यन परिडा, संवेदनाहरण विज्ञान।

डॉ. देवी प्रसाद, संधान शल्य चिकित्सा।

डॉ. अरूण, ई.एन.टी.।

डॉ. राखी, सूक्ष्मजीव विज्ञान।

डॉ. जिन्दाल, बाल शल्य चिकित्सा।

श्री. दिनकरन, नर्सिंग, जठरान्त्र,ओ.टी.।

कु. वनिता, नर्सिंग, यूरोलॉजी, ओ.टी.।

श्रीमती. एस. सुष्या, तकनीशियन, विकृति विज्ञान।

 

ग्रूप-10

ब्लड/इन्जेक्शन

डॉ. बिश्वजित दुभाषी, चिकित्सा अर्बुद विज्ञान।

 

डॉ. प्रतुल सिन्हा, ब्लड बैंक।

डॉ.एस. मणिकंठन, भेषजगुण विज्ञान।

डॉ. श्रीजित, वृक्क विज्ञान।

डॉ. अरविन्द रामकुमार, शल्यक अर्बुद विज्ञान।

डॉ. राखी कर, विकृति विज्ञान।

श्री. ज्ञानशेखर, तकनीशियन, ब्लड बैंक।

कोमती .एस., नर्सिंग, वार्ड-46।

डॉ. केशवन, औषधालय।

कु. कैथरिन, नर्सिंग, ई.एम.एस.डी.।

 

ग्रूप-11

प्रहरी घटनाएँ/ मूल कारण विश्लेषण

डॉ. सन्तोष सतीश, हृदय रोग विज्ञान।

 

डॉ. जय प्रकाश साहू, अन्तःस्राविकी।

डॉ. सरसु जयरामन, शरीर रचना विज्ञान।

डॉ. रवि फिलीप राजकुमार, मनोचिकित्सा।

डॉ.के. रमेश बाबू, नेत्र रोग विज्ञान।

डॉ. के.के. शाहा, विधि चिकित्सा।

आचार्य. गीतांजली, भेषजगुण विज्ञान।

श्री. सेन्गुट्टुवन, तकनीशियन, विकृति विज्ञान।

श्री.के. अल्लिमुत्तु, तकनीशियन, सूक्ष्मजीव विज्ञान।

के. शिवरंजनी, नर्सिंग, ई.एम.एस.डी.।

श्रीमती. वी. चित्रलेखा, समाज कल्याण अधिकारी। 

 

ग्रूप-12

विकिरण सुरक्षा

श्री.के. सरवणन, विकिरन चिकित्सा।

 

डॉ. स्वरूप, पी.एस.एम.।

डॉ. धनपथी .एच., नाभिकीय चिकित्सा।

डॉ. वी. कृष्णन, दन्त चिकित्सा।

डॉ. जी.एस. गौड़, शरीर क्रिया विज्ञान।

डॉ. अनिता रस्तोगी, प्रभारी, एम.आर.डी.।

डॉ. दीपक भारती, विकिरण विज्ञान।

डॉ. विजयप्रभु, विकिरण चिकित्सा।

श्री. सरवणन, नर्सिंग, डॉयालिसिस।

कु. एस. गोपालकृष्णन, तकनीशियन, जीवरसायन विज्ञान।

डेइसी. डी., नर्सिंग, आई.सी.यू. -32।

श्री. चिन्नप्पराज, भण्डार अधिकारी।

 

जेक्यूसी की क्रियाकलापों (31 दिसंबर 2012 से)

 

ग्रूप

 

वितरण

नवंबर एवं दिसंबर

जनवरी

 

 

ग्रूप-1

नॉसोकॉमियल संक्रमण।

1. आधारभूत संरचना सर्वेक्षण   आयोजन किया गया।

2. हस्त धोने के बारे में पॉकेट गाइड की तैयारी।

1. आधारभूत संरचना सर्वेक्षण का विश्लेषण।

2.हस्त धोने के बारे में पॉकेट गाइड का मुद्रण एवं परिचालन।

3.जिपमेर में रेशनल यूस ऑफ एन्टिबॉयोटिक्स के द्वितीय संस्करण का प्रकाशन।

 

 

 

 

 

 

ग्रूप -2

औषध प्रयोग की सुरक्षा।

सी-स्लिप के लिए टेम्पलेट मसौदा तैयार करके जेक्यूसी में परिचालित किया गया और इसकी टिप्पणी प्राप्त हुई। जिपमेर मुद्रणालय से संपर्क किया गया और सी-स्लिप्स के पॉइलेट टेस्टिंग की किताबों की मुद्रण कार्य में सहमति हुई है सी-स्लिप टेम्पॉलेट संशोधित कर अंतिम रूप स्वीकृत है। इसे कार्यान्वित करने का निर्णय लिया गया। 

मूल हस्ताक्षर सहित एक ही औषध निर्देश को स्वीकृत करने में औषधालय की सहमति प्राप्त हुई।

 

औषध प्रयोग की सुरक्षा परियोजना के निधि आबंटित करने के लिए एक संकल्पनात्मक प्रस्ताव स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग को भेजा गया।

जनवरी महीने के मध्य में कायचिकित्सा, त्वचा विज्ञान,  तंत्रिका विज्ञान, चिकित्सा अर्बुद विज्ञान एवं मनोचिकित्सा विभागों में प्रायोगिक जाँचें शुरू की जाएगी।

 

देहान्त बैठक के दौरान नैदानिक संकायों एवं रेजिडन्टों को सूचना देना और अंतःशिक्षु को ई-मेल द्वारा सूचना भेजना। अभिविन्यास कार्यक्रम -अंतःशिक्षु को सुग्राही बनाना।

 

ग्रूप-3

ई.एम.एस.डी.      -

रोगी देखभाल में प्रथमता एवं द्रुतगामी में पहला कदम जैसे :-

अधिक संख्या की भीड का परिवर्तका। ईडी फ्लोर प्रबन्धन का सुधार करना।

अंतःशिक्षु/सी.एम.ओ. को सक्ष्म बनाने के लिए प्रथमता (ट्रिऐज) के डेटा से आधारित निर्धारण।

 

प्रयोगशाला जाँचों के लिए पुनः रूपरेखा तैयार करने की प्रक्रिया।

 

 

ग्रूप-4

प्रत्यापन

 

वाचन एवं प्रत्यायन प्रक्रिया की समीक्षा।

जेक्यूसी फोरम में बनाये गए सभी बुकलेट, जाँच सूची का समन्वयन कार्य (डॉ. बिजु के साथ)।एन.ए.बी.एच. से नियंत्रित मार्गदर्शन की किताबों को प्राप्त करना।

 

 

 

 

 

 

ग्रूप-5

आग सुरक्षा/विपदा प्रबंधन।

जिपमेर आग सुरक्षा तत्परा समिति -12/20121 जिपमेर में आग सुरक्षा योजना बनाया गया। आग सुरक्षा अधिकारी। आग परीक्षण। 

कर्मचारियों एवं संकाय सदस्यों के लिए आग सुरक्षा अभिविन्वास कार्यक्रम आयोजित किया गया आर.ए.सी.ई/पी.ए.एस.एस. विभिन्न विभागों के 150 स्वयं सेवकों को प्रशिक्षण दिया गया।

 

सामान्य एस.ओ.पी.को विकसित किया गया। फयर अलर्ट के लिए समर्पित दूरभाष-6999 का संस्थापन किया गया।

 

 

 

 

 

 

प्रशासन ब्लॉक।

 

अग्निशामक यंत्रों उपलब्ध कराया गया। पी.ए.एस.एस.-सार्वजनिक भाषण व्यावस्था।इफेक्टिव फयर अलार्म सिस्टम एच.एल.एल.-फाइनल स्टेजस साइन्स फॉर एक्सिस्ट्स फ्लोर मेप्स/प्लान्स आर.सी.सी. एवं ई.एम.एस. में फायर ड्रिल स्थापना पूर्ण हुई।

 

 

 

 

ग्रूप-6

कार्यस्थल/श्रम बल की सुरक्षा।

1. फॉरमुलेटड ‘‘एस.ओ.पी. फॉर मैनेजमेन्ट ऑफ ऑक्यूपेशनल एक्सपॉर्शर टु बॉडी फ्लूइड्स इन जिपमेर, पुदुच्चेरी।‘‘ 

2. ‘‘हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स‘‘ के लिए पोस्ट एक्सपॉर्शर प्रोफॉईलाक्सिस के बारे में जिपमेर पुस्तिका तैयार किया गया।

 

3. एस.ओ.पी. का कार्यान्वित करने के लिए तथा उपर्युक्त दो कागज़ातों के स्वीकृत अंतिमरूप निकालने के लिए अपर चिकित्सा अधीक्षक की अध्यक्षता में सभी संबंधित विभागों को शामिल कर एक बैठक आयोजित किया गया।

 

4. जिपमेर के स्टाफ नर्सों के लिए हेपाटाइटिस-बी टीकाकरण की कार्य योजना बनायी गयी।

 

1. पोस्ट एक्सपोशर प्रोफॉइजाक्सिस के बारे में पोस्टर्स लगाना। 

2. जिपमेर कर्मचारियों को विशेषकर नर्सिंग स्टाफ से शुरूआत करके हेपाटाईटिस-बी टीकाकरण कार्यक्रम कार्यान्वित किया जाए।

 

3. हर एक विभाग में हुए विशिष्ट व्यावसायिक जोखिम के बारे में डेटा संग्रहण करना।

 

4. हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स  के लिए स्ट्रेस मैनेजमेन्ट सेल।

 

5. नीडिल स्टिक क्षतियों के लिए एस.ओ.पी. कार्यान्वयन में निगरानी करना।

 

    
ग्रूप-7नेवर इवेन्ट्स।

 

तंत्रिका शल्य चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा विभागों में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रायोगिक शल्यक सुरक्षा की जाँचसूची के A3 आकार का लॉमिनेटड पोस्टर का प्रदर्शन। 

ओ.टी. क्रॉस मेच फॉर्म ब्लड ट्रान्सफ्यूशन डिसाइन्ड।

 

जिपमेर के सभी ऑपरेशन थिएटरों में विश्व स्वास्थ्य संगठन के जाँच सूची का वितरण करना और प्रसूति कारणों से मृत्युदर कम करवाना।
ग्रूप-8

ऑपरेशन थिएटर की सुरक्षा।

बुक्लेट ऑफ ‘‘जिपमेर सर्जिकल सेफ्टी चेक लिस्ट।‘‘

 

प्रारंभिक तैयारी सुरक्षा सर्वेक्षण आयोजित किया गया।

 

डी.वी.टी. एन्ड हॉईपोथेर्मिया प्रिवेंशन के लिटरेचर रिव्यू।

जिपमेर स्पेसिफिक डी.वी.टी. गॉइडलाइन्स हॉइपोथेर्मिया प्रिवेंशन प्रोटोकॉल एट ऑपरेशन थिएटर। 

आउटलाइनिंग थिएटर स्टेरिलिटी प्रोटोकॉलस।

ग्रूप-9

एस.ओ.पी./जाँच सूची /संसूचना

 

 

डिज़ाइन्ड।

 

 

 

 

ग्रूप-10

ब्लड, इन्जेक्शन सुरक्षा।

1. ब्लड बैंक-दाता फीडबेक रजिस्टर- जलपान। 

2. दाता पंजीकरण- दाता साक्षात्कार, परामर्श, स्क्रीनिंग- रक्त दान-रक्तदानोपरान्त देखभाल दाता जलपान।

 

3. एड्युकेशन ऑफ-रूट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (गलत इन्जेक्शन) पोस्टर व बुक्लेट।

 

जेक्यूसी सदस्यों के बीच में पोस्टर्स एवं पुस्तिकाओं का परिचालन किया जाय। 

यदि अनुमोदन हो तो मुद्रण करके वितरण किया जाय।

 

4. सिरिंज एवं नीडिल्स का निपटान -पोस्टर्स।
ग्रूप-11प्रहरी घटनाएँ / मूलकारण विश्लेषण। ए माडल ऑफ रूट कॉस अनैलसिस एट मॉरटलिटी एन्ड मारॅबिडिटी मीटिंग एन्ड पॉइलोट्ड एट कार्डियोलॉजी। 

विकिरण सुरक्षा समिति बनाया गया और इसकी पहली बैठक 09.11.2012 को आयोजित किया गया।

इलेक्ट्रॉनिक एरर रिर्पोटिंग सिस्टम को विकसित करना।जिपमेर विशिष्ट मूल कारण विशेषण का नमूना निर्विष्ट के लिए सभी जेक्यूसी सदस्यों को परिचालित किया जाय, और अन्त में सभी विभागों में भेजा जाय।

 

यूरोलॉजी ओ.टी. के नैदानिक एकक में विकिरण सर्वेक्षण किया जाएगा।

 

 

 

 

 

 

ग्रूप-12

विकिरण सुरक्षा।

विकिरण निदान के सभी निदानात्मक संस्थापनों का विकिरण सर्वेक्षण किया जाए। 

दो संस्थापनों में अपेक्षित मूल सुरक्षा शर्तों का पालन नहीं किया गया।

 

सुरक्षा पुनःस्थापित करने के लिए आवश्यक कदम बनाये रखे है।

 

नाभिकीय चिकित्सा विभाग में वर्ष 2012 का विकिरण सुरक्षा का वार्षिक स्थिति रिपोर्ट तैयार किया और ए.ई.आर.बी. को प्रस्तुत किया गया।

 

लघु ओ.टी. में स्थित डेन्टल एक्सरे एकक रेजि़डेन्ट्स का  कार्यालय, भण्डार एवं विश्राम कक्ष के रूप में इस्तेमाल किया जाय। इसके कारण कार्यालय एवं पराचिकित्सीय कर्मचारियों को विकिरण की अवस्थिति होती है। विकिरण सर्वेक्षण किया जाय और उचित सिफ़ारिशें दिए जाएंगे।

 

 

 

वैयक्तिक निगरानी उपलब्ध कराने के लिए तेरह आवेदन प्राप्त हुए हैं। 

विकिरण क्षेत्र में काम करनेवाले कर्मचारियों को बैज का इन्तजाम हो गया और जल्द ही बैज कर्मचारियों को दिया जाएगा।

 

विकिरण विभाग में वर्ष 2012 का विकिरण सुरक्षा का वार्षिक स्टेटस रिपोर्ट संसोधित होनेवाले है और जल्द ही रिपोर्ट ए.ई.आर.बी. को प्रस्तुत किया जाएगा।

 

 

बॉन डेन्सिटोमीटर एन्ड गॉमा इराडिएटर जगह की कमी होने के कारण संस्थापन नहीं हो पाया है।

 

 

संपर्क

डॉ. मुरूगानन्दम.के

सदस्य सचिव एवं समन्वयक,

सहायक आचार्य, यूरोलॉजी, जिपमेर, पुदुच्चेरी-6 ।

दूरभाष: $91&9952014597

ई.मेल : Patientsafety.jqc@gmail.com

http://www.jipmer.edu.in/about-us/organisation/administration/director/

http://www.jipmer.edu.in/ हमारे बारे में/संगठन/प्रशासन/निदेशक/

 

निदेशक

संस्थान का प्रधान निदेशक है, वे मुख्य कार्यपालक के रूप में संस्थान व चिकित्सालय के प्रशासन कार्य संचालन का संपूर्ण दायित्व उनपर निहित हैं।

नाम : डॉ. टी.एस. रविकुमार

ईमेल: director@jipmer.edu.in

संपर्क सूत्र: 0413-2296002

 

वैयक्तिक सहायक

नाम                  संपर्क सूत्र

सुरेश बाबू              0413-2296002

ई. रामकुमार           0413-2296002

आशुलिपिक ग्रेड- II

 

 

http://www.jipmer.edu.in/about-us/organisation/administration/medical-superintendent/

http://www.jipmer.edu.in/ हमारे बारे में/संगठन प्रशासन/चिकित्‍सा अधीक्षक

चिकित्‍सा अधीक्षक

             चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक ने रोगी देखभाल से संबंधित संपूर्ण कार्यों का समन्वयन करते हैं। कुल 28 शैक्षिक विभागों है, जिनके मुख्य आचार्य हैं चिकित्सालय अनुषंगी सेवा एककों की पर्यवेक्षण तकनीकी अध्यक्षों से होता है।

नाम : डॉ. ए.के. दास

ईमेल: medsupt@jipmer.edu.in

संपर्क सूत्र: 0413-2296502

वैयक्तिक सहायक

नाम                  संपर्क सूत्र

ए. राजवेलु             0413-2296502

 

http://www.jipmer.edu.in/about-us/organisation/administration/dean/

http://www.jipmer.edu.in/हमारे बारे में/संगठन/प्रशासन/संकायाध्‍यक्ष

संकायाध्‍यक्ष

संकायाध्यक्ष ने संस्थान के सभी शैक्षिक क्रियाकलापों, शिक्षण एवं अनुसंधान कार्यों को मिलकर समन्वयन कार्य में निदेशक की मदद करते हैं।

नाम : डॉ. के.एस. रेड्डी

ईमेल: dean@jipmer.edu.in

संपर्क सूत्र: 0413-2296101

वैयक्तिक सहायक

नाम                  संपर्क सूत्र

राजेन्द्रबाबू             0413-2296101

 

 

http://www.jipmer.edu.in/about-us/organisation/administration/administrative-contacts/

http://www.jipmer.edu.in/ हमारे बारे में/संगठन/प्रशासन/प्रशासनिक-संपर्क/

 

प्रशासनिक –संपर्क

 

पद्नाम

मुख्‍य दूरभाष/ इन्‍टरकॉम संख्‍या

निदेशक 2272901/ 2000
संकायाध्‍यक्ष 2272066, 2277276/3000
चिकित्‍सा अधीक्षक 2272735/4000
अपर चिकित्‍सा अधीक्षक -
अपर चिकित्‍सा अधीक्षक -
उप चिकित्‍सा अधीक्षक 4003/5419
मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी (प्रशासन) 2110/5412
मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी (वि.प्र) 2120/5408
प्रशासनिक अधिकारी 2126
लेखा अधिकारी 2050
पंजीयक (शैक्षिक) 3100
सहायक पंजीयक (शैक्षिक) 3101
सहायक प्रशासनिक अधिकारी (संस्‍थान) 2210
सहायक लेखा अधिकारी 2412
सहायक लेखा अधिकारी (चिकित्‍सालय) 4006
मुख्‍य नर्सिंग अधिकारी 4010
नर्सिंग अधीक्षक 4012/5521
सहायक श्रम कल्‍याण आयुक्‍त 2320/5532
एस.ओ.सी. सेवा अधिकारी पी.आर.ओ. -

 

http://www.jipmer.edu.in/ हमारे बारे में/संगठन/शासी निकाय/

शासी निकाय

क्रम सं.

नाम

पद्नाम

1

आचार्य (डॉ) एन. के. गांगुली          अध्यक्षपूर्व महानिदेशक, भारतीय आयुर्विज्ञान

अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली।

 

अध्‍यक्ष

2

श्री. एस. एस. रामसुब्बुमाननीय सांसद (लोक सभा) सदस्‍य

 

3

श्री. के. चन्द्रमौलीसचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार।

 

श्री. पी.के. प्रधान

सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ।

 

सदस्‍य (16.10.2011 तक) 

 

 

सदस्‍य (17.10.2011 से)

4

डॉ. आर.के. श्रीवास्तवस्वास्थ्य सेवा महानिदेशक

भारत सरकार।

 

डॉ. जगदीश प्रसाद,

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक

भारत सरकार।

 

सदस्‍य (30.11.2011 तक) 

 

 

 

सदस्‍य (01.12.2011 से)

5

श्री. नावेद मसूदअपर सचिव एवं वित्त सलाहकार,

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,

भारत सरकार।

 

श्री राजन कटोच

अपर सचिव व वित्त सलाहकार,

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,

भारत सरकार।

 

श्री आर.के. जैन

अपर सचिव व वित्त सलाहकार,

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,

भारत सरकार।

सदस्‍य (31.07.2011 तक)

 

 

 

 

 

सदस्‍य (अक्‍तूबर 2011 तक)

 

 

 

 

 

 

सदस्‍य (अक्‍तूबर 2011 से)

 

 

 

 

 

6

श्री  आर.  चन्द्रमोहनमुख्य सचिव, पुदुच्चेरी सरकार।

 

श्रीमती एस. सत्यवती

मुख्य सचिव,  पुदुच्चेरी सरकार।

सदस्‍य (12.08.2011 तक) 

 

सदस्‍य (12.08.2011 से)

 

7

 आचार्य (डॉ.) एम.एस. रामचन्द्रन

पूर्व आचार्य व विभागाध्यक्ष,

कायचिकित्सा विज्ञान विभाग,

मद्रास चिकित्सा महाविद्यालय, चेन्नै।

 


सदस्‍य

8

 डॉ. वी. कनकराज,

पूर्व आचार्य व विभागाध्यक्ष,

संवेदनाहरण विज्ञान विभाग,

मद्रास चिकित्सा महाविद्यालय, चेन्नै।

 

सदस्‍य

9

 आचार्य (डॉ.) आर. सुरेन्द्रन

पूर्व आचार्य व अध्यक्ष,

शल्य जठरान्त्र विज्ञान संस्थान,

सरकार स्टैनले चिकित्सा महाविद्यालय,

चेन्नै।

 

 सदस्‍य

 

10

 डॉ.एस. बद्रीनाथ

आचार्यद, सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग

व परियोजना समन्वयक,

जिपमेर।

 

सदस्‍य

11

 डॉ. एस. श्रीनिवासन

आचार्य व अध्यक्ष,

बाल चिकित्सा विभाग, जिपमेर।

 

सदस्‍य (30.11.2011 तक)

12

डॉ. के. एस. रेड्डीसंकायाध्यक्ष, जिपमेर।

 

सदस्‍य

13

सरकार द्वारा मनोनीत  सदस्‍य

14

सरकार द्वारा मनोनीत 

 

सदस्‍य

 

 

 

15

 डॉ. के.एस.वी.के. सुब्बा राव

निदेशक,  जिपमेर।

 

डॉ. टी.एस. रविकुमार

निदेशक, जिपमेर।

 

सदस्‍य सचिव (04.12.2011 तक)

 

सदस्‍य सचिव (05.12.2011 से)

 

विशेष आमंत्रित अतिथि

श्री. देबाशीष पांडासंयुक्त सचिव,

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय।

सदस्‍य

 

 

http://www.jipmer.edu.in/हमारे बारे में/संगठन/संस्‍थान निकाय/

संस्‍थान निकाय  

 

क्रम सं.

नाम

पद्नाम

1

आचार्य (डॉ) एन. के. गांगुली          अध्यक्षपूर्व महानिदेशक, भारतीय आयुर्विज्ञान

अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली।

 

अध्‍यक्ष

पदेन सदस्‍य

2

श्री. के. चन्द्रमौलीसचिव,

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,

भारत सरकार।

श्री. पी.के. प्रधान

सचिव,

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,

भारत सरकार।

 

 

सदस्‍य (16.10.2011 तक) 

सदस्‍य (17.10.2011 से)

3

डॉ. जे.ए.के. तरीन कुलपति

पांडिच्चेरी विश्वविद्यालय।

 

 सदस्‍य

4

डॉ. मयिल वाहनन नटराजनकुलपति

तमिलनाडू डॉ. एम.जी.आर. चिकित्सा विश्वविद्यालय, चेन्नै।

 

सदस्‍य

5

डॉ. आर.के. श्रीवास्तवस्वास्थ्य सेवा महानिदेशक

भारत सरकार।

 

डॉ. जगदीश प्रसाद,

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक

भारत सरकार।

 

सदस्‍य (30.11.2011 तक) 

 

 

सदस्‍य (01.12.2011 से)

6

श्री  आर. चन्द्रमोहनमुख्य सचिव,

पुदुच्चेरी सरकार।

 

श्रीमती एस. सत्यवती

मुख्य सचिव,

पुदुच्चेरी सरकार।

 

सदस्‍य (12.08.2011 तक) 

सदस्‍य (12.08.2011 से)

7

श्री. नावेद मसूदअपर सचिव एवं वित्त सलाहकार,

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

भारत सरकार।

 

श्री.राजन कटोच

अपर सचिव व वित्त सलाहकार

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,

भारत सरकार।

 

श्री आर.के. जैन

अपर सचिव व वित्त सलाहकार

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,

भारत सरकार।

 

सदस्‍य (31.07.2011 तक) 

सदस्‍य (अक्‍तूबर 2011 तक)

 

 

 

 

 

 

 

सदस्‍य (अक्‍तूबर 2011 से)

 

8

भारत सरकार का सचिव या उनका                 मनोनीत व्यक्ति(जो संयुक्त सचिव पद के हो)

उच्च शिक्षा विभाग

मानव संसाधन विकास मंत्रालय

सदस्‍य

9

 डॉ. के.एस.वी.के. सुब्बा राव

निदेशक,  जिपमेर।

 

डॉ. टी.एस. रविकुमार

निदेशक, जिपमेर।

 

सदस्‍य सचिव (04.12.2011 तक)

 

सदस्‍य सचिव (05.12.2011 से)

 

मनोनीत सदस्‍य- गण

 

10

 आचार्य (डॉ)  एम.एस. रामचन्द्रन

पूर्व आचार्य व विभागाध्यक्ष,  

कायचिकित्सा विज्ञान विभाग,

मद्रास चिकित्सा महाविद्यालय,

चेन्नै।

 

सदस्‍य

11

आचार्य इंदिरा चक्रवर्तीपूर्व निदेशक,   

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और सार्वजनिक स्वास्थ्य,  कोलकत्ता।

 

सदस्‍य

12

आचार्य डॉ. डी. विश्वनाथनपूर्व कुलपति,

अण्णा विश्वविद्यालय,  चेन्नै।

सदस्‍य

13

डॉ. वी. कनकराज,पूर्व आचार्य व विभागाध्यक्ष,

संवेदनाहरण विज्ञान विभाग,

मद्रास चिकित्सा महाविद्यालय,   चेन्नै।

सदस्‍य

14

डॉ. बी.के. गोयलनिदेशक,  अंतःक्षेप हृदय रोग विज्ञान

व माननीय संकायाध्यक्ष,

बाम्बे चिकित्सालय व आयुर्विज्ञान

अनुसंधान केन्द्र, मुम्बई।

सदस्‍य

15

आचार्य अविजित बनर्जीकार्यक्रम-समन्वयक,

उन्नत अध्ययन केन्द्र-रसायन विज्ञान विभाग,

यूनिवर्सिटी कालेज़ ऑफ साइन्स व  टैक्नोलॉजी, कोलकाता।

 

सदस्‍य

16

आचार्य (डॉ.) सुनीता मित्तल                      आचार्य व अध्यक्ष,  

प्रसूति व स्त्रीरोग विज्ञान विभाग,

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान

नई दिल्ली।

 

सदस्‍य

17

आचार्य (डॉ.) के.के. तलवारपूर्व निदेशक,  पी.जी.आई.एम.ई.आर.,  

चंडीगढ़।

सदस्‍य

18

आचार्य (डॉ.) डी. नागराजपूर्व निदेशक/कुलपति,  

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान,  बैंगलोर।

 

सदस्‍य

19

आचार्य (डॉ.) डी. नागराजपूर्व निदेशक/कुलपति,

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान,  बैंगलोर।

सदस्‍य

 

संसद से निर्वाचित सदस्‍य

 

1

श्री. बी.एस. ज्ञानदेशिकनमाननीय संसद सदस्य (राज्य सभा)

 

सदस्‍य

2

श्री. एस.एस. रामसुब्बु माननीय संसद सदस्य (लोक सभा)

 

सदस्‍य

3

डॉ. संजय जायसवालमाननीय संसद सदस्य (लोक सभा)

 

सदस्‍य

 

विशेष आमंत्रित अतिथि

श्री. देबाशीष पांडासंयुक्त सचिव,

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय।

सदस्‍य

 

http://www.jipmer.edu.in/हमारे बारे में/संगठन/समिति/

 

समिति

स्‍थायी वित्‍त समिति

क्रम सं.

नाम

समिति में स्‍थान

1

श्री. के. चन्द्रमौलीसचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार।

श्री. पी.के. प्रधान

सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार।

 

अध्‍यक्ष (16.10.2011 तक) 

 

 

अध्‍यक्ष (17.10.2011 से)

2

डॉ. संजय जायसवाल                        माननीय संसद सदस्य (लोकसभा)

 

सदस्‍य

 

 

3

डॉ. आर.के. श्रीवास्तवस्वास्थ्य सेवा महानिदेशक,

भारत सरकार।

 

डॉ. जगदीश प्रसाद,

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक

भारत सरकार।

 

सदस्‍य (30.11.2011 तक) 

 

 

 

सदस्‍य (01.12.2011 से)

4

श्री. नावेद मसूदअपर सचिव एवं वित्त सलाहकार,

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,

भारत सरकार।

 

श्री राजन कटोच

अपर सचिव व वित्त सलाहकार,   

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,

भारत सरकार।

 

श्री आर.के. जैन

अपर सचिव व वित्त सलाहकार,

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,

भारत सरकार।

 

सदस्‍य (31.07.2011 तक) 

 

 

 

 

सदस्‍य (अक्‍तूबर 2011 तक)

 

 

 

 

 

 

सदस्‍य (अक्‍तूबर 2011 तक)

 

5

श्री आर. चन्द्रमोहनमुख्य सचिव,  

पुदुच्चेरी सरकार।

 

श्रीमती एस. सत्यवती

मुख्य सचिव,  

पुदुच्चेरी सरकार।

 

सदस्‍य (12.08.2011 तक) 

 

 

 

सदस्‍य (12.08.2011 से)

 

6

आचार्य (डॉ.) के. के. तलवारपूर्व निदेशक, पी.जी.आई.एम.ई.आर.,

चंडीगढ़।

सदस्‍य

 

7

आचार्य (डॉ.) डी. नागराजपूर्व निदेशक/कुलपति,

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान,  बैंगलोर।

 

सदस्‍य

8

आचार्य डॉ. डी. विश्वनाथनपूर्व कुलपति,

अण्णा विश्वविद्यालय, चेन्नै।

 

सदस्‍य

9

डॉ. वी. कनकराज,पूर्व आचार्य व विभागाध्यक्ष,

संवेदनाहरण विज्ञान विभाग,

मद्रास चिकित्सा महाविद्यालय, चेन्नै।

 

सदस्‍य

10

आचार्य इंदिरा चक्रवर्तीपूर्व निदेशक,   

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और सार्वजनिक स्वास्थ्य, कोलकत्ता।

 

सदस्‍य

11

 डॉ. के.एस.वी.के. सुब्बा राव

निदेशक,  जिपमेर।

 

डॉ. टी.एस. रविकुमार

निदेशक, जिपमेर।

 

सदस्‍य सचिव (04.12.2011 तक)

 

सदस्‍य सचिव (05.12.2011 से)

 

स्‍थायी चयन समिति

क्रम सं.

नाम

समिति में स्‍थान

1

आचार्य (डॉ) आर. सुरेन्द्रनआचार्य व अध्यक्ष

शल्य जठरान्त्र विज्ञान संस्थान

राजकीय स्टैनले चिकित्सा

अध्‍यक्ष

 

महाविद्यालय,चेन्नै।

 

 

2

डॉ.आर.के. श्रीवास्तवस्वास्थ्य सेवा महानिदेशक,

भारत सरकार।

 

डॉ. जगदीश प्रसाद,

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक

भारत सरकार।

 

सदस्‍य (30.11.2011 तक) 

 

 

 

सदस्‍य (01.12.2011 से)

 

3

आचार्य डॉ.के.के. तलवारपूर्व निदेशक, पी.जी.आई.एम.ई.आर., चंडीगढ़।

 

सदस्‍य

4

आचार्य (डॉ) डी. नागराजपूर्व निदेशक/कुलपति,

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान, बैंगलूर।

 

सदस्‍य

5

आचार्य (डॉ.) एम.एस. रामचन्द्रनपूर्व आचार्य व विभागाध्यक्ष,

कायचिकित्सा विज्ञान विभाग,

मद्रास चिकित्सा महाविद्यालय, चेन्नै।

 

सदस्‍य

6

डॉ. वी. कनकराज,पूर्व आचार्य व विभागाध्यक्ष,

संवेदनाहरण विज्ञान विभाग,

मद्रास चिकित्सा महाविद्यालय, चेन्नै।

 

सदस्‍य

7

आचार्य इंदिरा चक्रवर्तीपूर्व निदेशक

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और सार्वजनिक स्वास्थ्य, कोलकत्ता।

सदस्‍य

 

 

8

डॉ. एन. सरस्वती                             पूर्व निदेशक, प्रसूति व स्त्री रोग विज्ञान संस्थान, चेन्नै।

 

सदस्‍य

9

डॉ. नल्ली युवराजसह आचार्य,

मेरूदण्ड शल्य चिकित्सा, एम.एम.सी., चेन्नै।

 

सदस्‍य

 

10

डॉ. के.एस.वी.के. सुब्बा रावनिदेशक,  जिपमेर।

 

डॉ. टी.एस. रविकुमार

निदेशक, जिपमेर।

 

सदस्‍य सचिव (04.12.2011 तक)सदस्‍य सचिव (05.12.2011 से)

 

स्‍थायी शैक्षणिक समिति

क्रम सं.

नाम

समिति में स्‍थान

1

आचार्य (डॉ) एम.एस. रामचन्द्रनपूर्व आचार्य व विभागाध्यक्ष,

कायचिकित्सा विज्ञान विभाग,

मद्रास चिकित्सा महाविद्यालय,

चेन्नै।

 

अध्‍यक्ष

2

श्री. बी.एस. ज्ञानदेशिकन                         माननीय संसद सदस्य (राज्य सभा)

 

सदस्‍य

3

डॉ. आर.के. श्रीवास्तवस्वास्थ्य सेवा महानिदेशक

भारत सरकार।

डॉ. जगदीश प्रसाद,

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक

भारत सरकार।

सदस्‍य (30.11.2011 तक) 

 

 

 

सदस्‍य (01.12.2011 से)

 

 

4

डॉ. मयिल वाहनन नटराजन    कुलपति,

तमिलनाडु डॉ. एम.जी.आर. चिकित्सा विश्वविद्यालय, चेन्नै ।

 

सदस्‍य

5

आचार्य डॉ.के.के. तलवारपूर्व निदेशक, पी.जी.आई.एम.ई.आर., चंडीगढ़।

 

सदस्‍य

6

आचार्य (डॉ) डी. नागराजपूर्व निदेशक/कुलपति,

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान, बैंगलूर।

 

सदस्‍य

7

आचार्य (डॉ) सुनीता मित्तल                   आचार्य व अध्यक्ष,

प्रसूति व स्त्रीरोग विज्ञान विभाग

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान

नई दिल्ली।

 

सदस्‍य

8

आचार्य (डॉ) आर. सुरेन्द्रनपूर्व आचार्य व अध्यक्ष

शल्य जठरान्त्र विज्ञान संस्थान

राजकीय स्टैनले चिकित्सा महाविद्यालय,

चेन्नै।

 

सदस्‍य

9

डॉ. वी.आई. मदन                        पूर्व निदेशक, सी.एम.सी., वेल्लूर।

 

सदस्‍य

 

 

10

डॉ. वी.एम. कटोच  सचिव-स्वास्थ्य एवं अनुसंधान विभाग एवं महानिदेशक, आई. सी. एम. आर,

नई दिल्ली।

 

सदस्‍य

11

सचिव या उनके मनोनीत व्यक्ति(जो संयुक्त सचिव पद के हो)

उच्च शिक्षा विभाग,

मानव संसाधन विकास मंत्रालय,

भारत सरकार।

 

सदस्‍य

12

डॉ. के.एस. रेड्डी,संकायाध्यक्ष,

जिपमेर।

 

सदस्‍य

13

डॉ. के.एस.वी.के. सुब्बा रावनिदेशक,  जिपमेर।

 

डॉ. टी.एस. रविकुमार

निदेशक, जिपमेर।

 

सदस्‍य सचिव (04.12.2011 तक) 

सदस्‍य सचिव (05.12.2011 से)

 

स्‍थायी संपदा समिति

क्रम सं.

नाम

समिति में स्‍थान

1

आचार्य डॉ. डी. विश्वनाथनपूर्व कुलपति,

अण्णा विश्वविद्यालय, चेन्नै।

 

अध्‍यक्ष

2

श्री. बी.एस. ज्ञानदेशिकन                         माननीय संसद सदस्य (राज्य सभा)

 

सदस्‍य

 

 

3

डॉ. बी.के. गोयलनिदेशक,  अंतःक्षेप हृदय रोग विज्ञान

व माननीय संकायाध्यक्ष,

बाम्बे चिकित्सालय व आयुर्विज्ञान

अनुसंधान केन्द्र, मुम्बई।

 

सदस्‍य

4

श्री आर. चन्द्रमोहनमुख्य सचिव,  

पुदुच्चेरी सरकार।

 

श्रीमती एस. सत्यवती

मुख्य सचिव,  

पुदुच्चेरी सरकार।

 

सदस्‍य (12.08.2011 तक) 

 

 

 

सदस्‍य (12.08.2011 से)

 

5

आचार्य (डॉ) डी. नागराजपूर्व निदेशक/कुलपति,

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान, बैंगलूर।

 

सदस्‍य

6

डॉ. पी.एच. अनंतनारायणन                        आचार्य व विभागाध्यक्ष,

जीवरसायन विज्ञान विभाग,

जिपमेर।

सदस्‍य

7

डॉ. एस. बद्रीनाथ आचार्य, सूक्षमजीव विज्ञान

विभाग एवं परियोजना समन्वयक,

जिपमेर।

 

सदस्‍य

8

डॉ. के.एस.वी.के. सुब्बा रावनिदेशक,  जिपमेर।

 

डॉ. टी.एस. रविकुमार

निदेशक, जिपमेर।

सदस्‍य सचिव (04.12.2011 तक) 

सदस्‍य सचिव (05.12.2011 से)

 

स्‍थायी चिकित्‍सालय प्रबंध समिति

 

क्रम सं.

नाम

समिति में स्‍थान

1

डॉ. आर.के. श्रीवास्तवस्वास्थ्य सेवा महानिदेशक

भारत सरकार।

डॉ. जगदीश प्रसाद,

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक

भारत सरकार।

 

अध्‍यक्ष (30.11.2011 तक) 

 

 

 

सदस्‍य (01.12.2011 से)

 

2

डॉ. संजय जायसवाल                        माननीय संसद सदस्य (लोकसभा)

 

सदस्‍य

3

आचार्य (डॉ) डी. नागराजपूर्व निदेशक/कुलपति,

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान, बैंगलूर।

 

सदस्‍य

4

आचार्य (डॉ) एम.एस. रामचन्द्रनपूर्व आचार्य व विभागाध्यक्ष,

कायचिकित्सा विज्ञान विभाग,

मद्रास चिकित्सा महाविद्यालय, चेन्नै।

 

सदस्‍य

5

डॉ. वी. कनकराज,पूर्व आचार्य व विभागाध्यक्ष,

संवेदनाहरण विज्ञान विभाग,

मद्रास चिकित्सा महाविद्यालय, चेन्नै।

 

सदस्‍य

6

आचार्य अविजित  बनर्जी                            कार्यक्रम – समन्वयक,

अग्रवर्ती अध्ययन केन्द्र रसायन विज्ञान विभाग,

यूनिवर्सिटी कालेज़ ऑफ साइन्स व टैक्नोलॉजी, कोलकत्ता।

सदस्‍य

 

7

डॉ. ए.के. दास                           वरिष्ठ आचार्य व चिकित्सा अधीक्षक

जिपमेर।

 

सदस्‍य

8

डॉ. एस. श्रीनिवासन                            आचार्य व अध्यक्ष,

बालरोग विज्ञान विभाग, जिपमेर।

 

सदस्‍य

9

डॉ. के.एस.वी.के. सुब्बा रावनिदेशक,  जिपमेर।

 

डॉ. टी.एस. रविकुमार

निदेशक, जिपमेर।

सदस्‍य सचिव (04.12.2011 तक) 

सदस्‍य सचिव (05.12.2011 से)

 

 

http://www.jipmer.edu.in/हमारे बारे में/सामान्‍य सूचना

सामान्‍य सूचना

 

जिपमेर, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय महत्व का संस्थान (स्वायत्त निकाय) के रूप में ट:शरि देखरेख की एक रफेरल चिकित्सालय हैं।

इस संस्थान के तीन मुख्य कार्य निम्नानुसार है।

  • स्नातकपूर्व एवं स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान एवं पराचिकित्सीय पाठ्यक्रमों में    गुणवत्ता शिक्षा प्रदान करना।
  • आयुर्विज्ञान अनुसंधान में प्रवृत्ति रखना।
    • उच्च स्तर की रोगी देखरेख प्रदान करना।

 

http://www.jipmer.edu.in/हमारे बारे में/सामान्‍य सूचना/वृतान्‍त/मील का पत्‍थर/

 

  • वृतान्‍त एवं मील का पत्‍थर

 

  • जवाहरलाल स्नातकोत्तर आयृर्विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (जिपमेर) की शुरूआत सन् 1823 ई में फ्रेंच सरकार द्वारा स्थापित ‘‘इकोल द मेडिसिन द पांडिच्चेरी’’ से हुई है।
  • यह कॉलेज उच्च न्यायालय के संशोधित मकान में बसे हुए थे अब यह विधायी सभा हॉल हैं।
  • सन् 1956 में फ्रॉन्स के राजदूत द्वारा हमारे नये आयुर्विज्ञान कॉलेज का शिलान्यास किया गया। यह कॉलेज पांडिच्चेरी शहर के बाहरी छोर पर स्थित है।
  • पांडिच्चेरी के भारत सरकार से ‘‘दे फेक्टो‘‘ वास्तविक हस्तांतरण के बाद  भारत सरकार ने इसका नाम धन्वंतरि मेडिकल कॉलेज रखा गया, और बाद में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशालय  (डी.जी.एच.एस.) के अधीन इस संस्थान को क्षेत्रीय स्नातकोत्तर केन्द्र के रूप में उन्नयन करके जिपमेर नाम से पुनःनामित किया गया।
  • दिनांक 13 जुलाई 1964 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एस.राधाकृष्णन ने चिकित्सालय एवं बहिरंग रोगी मकान का उद्घाटन किया।

 

  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली एवं स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, चन्डीगढ़ की तरह संसद के अधिनियम द्वारा जुलाई 2008 को जिपमेर को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान की स्थिति दी गई। वित्तीय परिव्यय की बढ़ोत्तरी के परिणाम स्वरूप संस्थान का सर्वोपरी विकास और कर्मचारियों, छात्रों एवं सवेाओं की संख्या में वृद्धि हुई।

 

  • दिनांक 15 अक्तूबर 2008 को भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, डॉ. अन्बुमणि रामदास के सानिध्य में अति विशिष्टता ब्लॉक, ट्रॉमा केयर एवं सभागार का उद्घाटन कर जिपमेर को राष्ट्रीय महत्व संस्थान के रूप में राष्ट्र को समर्पित किया गया।

 

  • जिपमेर (फेस- II) के वर्तमान विस्तार का काम प्रगतिपथ पर है वे निम्नानुसार है जिपमेर महिला एवं बाल चिकित्सालय, जिपमेर शैक्षिक केन्द्र, स्नातकपूर्व एवं स्नातकोत्तर के लिए नई छात्रावास समुच्चय, और व्यायामशाला, भोजनालाय एवं अन्य सुविधाओं सहित एक सामान्य वेल्नस केन्द्र भी शामिल है।

 

http://www.jipmer.edu.in/हमारे बारे में/सामान्‍य सूचना/लक्ष्‍य – दृष्टिकोण/

हमारी दृष्टिकोण

शिक्षा में नवीनता, रोगी उन्मुख अनुसंधान, जनसंख्या स्वास्थ्य एवं सेवा उत्कृष्टता में नवाचारों के माध्यम से भारत में स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए जिपमेर एक नमूना बनाना चाहता है।

हमारा लक्ष्‍य

सहानुभूतिशील, विशेषज्ञ स्वास्थ्य संव्यवसायिकों के गहन उच्च क्रम के स्वास्थ्य देखभाल की सेवाओं को प्रदान करना है।

  • शिक्षा में नवीनता के कारण स्वास्थ्य देखरेख में आजीवन नौसिखिया तथा निपुण बन पाते हैं।
  • मूल विज्ञान एवं रोगी उन्मुख अन्वेषण में मौलिक अनुसंधान का कार्य करना।
  • रचनात्मक युवा पीढ़ी को अपनी पूरी क्षमता तक पहुँचाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
  • पूरे संगठन में क्लिनिकल परिवर्तन रोगी केन्द्रित, सुरक्षित, प्रभावी, जवाब देह और पारदर्शी होना है।
  • सभी प्रयासों में गुणवत्ता एवं मूल्य पर महत्व देना है।
  • संगत आदर्शों को सम्मिलित करके संगठनों के साथ साझेदारी।
  • सामाजिक-आर्थिक असमानताओं पर ध्यान देने के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य एवं जन स्वास्थ्य का पक्ष-समर्थन करना है।

 

 

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भविष्‍य योजनाऍं

 

  • शैक्षणिक
  • जिपमेर में, 12 वें पंचवर्षीय योजना के तहत 150 करोड़ रूपये की परिव्यय करके एक सार्वजनिक स्वास्थ्य विद्यालय एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों की प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना करने का प्रस्ताव भी है। आशा करते हैं कि पूरे भारत भर में सभी जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के लिए एक प्रशिक्षित दल को तैयार किया जा सकते हैं। संबंद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संस्थान की स्थापना से पराचिकित्सीय पाठ्यक्रमों को केन्द्रित करके देश के स्वास्थ्य जनशक्ति को बढ़ाया जाएगा।

 

  • भारत में गैर संचारी रोग व्यापक रूप में फैला जा रहा है, गैर संचारी रोगों का प्रबंधन एवं प्रशिक्षण, अनुसंधान केन्द्र के लिए योजना बनायी गयी है। विभिन्न स्नातकपूर्व एवं स्नातकोत्तर एवं अति विशिष्टता पाठ्यक्रमों में सीटों की वृद्धि के अलावा औषध-निर्माण विज्ञान संस्थान एवं दन्त विज्ञान संस्थान शुरू करने की योजना है। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में स्वास्थ्य पेशे की शिक्षा केन्द्र तथा पाठ्यक्रम सुधार तथा ई.लर्निंग व एम.लर्निंग केन्द्र एवं दूरस्थ शिक्षा/स्किल लैब्स आदि में जिपमेर एक नव प्रवर्त्‍तक के रूप में अपनी पहचान देकर उत्कृष्ट रहेगा।
  • रोगी देखभाल
  • जिपमेर द्वारा प्रदान किये जा रहे अतुल्य चिकित्सा सेवाएं नये अतिविशिष्टता एवं विशिष्ट क्षेत्रों – जैसे बाल हृदय विज्ञान, बाल हृदय शल्य चिकित्सा, भ्रूण चिकित्सा, मेडिकल जिनेटिक्स, नवजात विज्ञान, आदि विशिष्ट सेवाएं सक्षम रूप से प्रदान जाती है। इसके अतिरिक्त अलग एकक/विभाग/केन्द्र जैसे उन्नत तंत्रिका-वॉस्कुलर एकक, बाल चिकित्सा उन्नत केन्द्र का विकास, संवेदनाहरण विज्ञान विभाग में तीव्र देखभाल एकक का उन्नयन, संवेदनाहरण विज्ञान विभाग तथा नवजात संवेदनाहरण विज्ञान विभाग में वेदना एवं उपशामक देखभाल केन्द्र, क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी, इन्टरवेंशनल मेडिसिन, लेज़र यूरोलॉजिकल सेवाएं, एन्डो-यूरोलॉजी सेवाएं, रोबॉटिक शल्य चिकित्साएं, स्टीरियोटॉक्टिक शल्य चिकित्साएं, न्यूक्लियर इमेजिंग प्रौद्योगिकी जैसे पी.ई.टी., स्केन, ब्रेस्ट क्लिनिक, वॉस्कुलर सर्जरी यूनिट, मिनिमली इन्वेसिव सर्जरी यूनिट, एन्डोक्रॉइनोलॉजी का रीनल साइन्सस सेन्टर आदि सेवाओं की संस्थापन के लिए 200 करोड़ रूपये के खर्च में कार्य प्रगति पर है।

 

  • ट्रॉमा केयर एवं बर्नस यूनिट के उन्नयन एवं कृत्रिम अंग सेन्टर, घाव चिकित्सा एवं अनुसंधान का उन्नत केन्द्र, लेज़र कॉसमेटोलॉजी केन्द्र एवं डर्मेटो-शल्य चिकित्सा केन्द्र आदि का उन्नयन के लिए अतिरिक्त 50 करोड़ स्पये की खर्च की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से 20 करोड़ रूपये के खर्च में आठ अउटरीच केन्द्रों की संस्थापन किया जाएगा।

 

  • काड़ावेरिक लिवर ट्रॉन्सप्लान्ट, कॉर्निअल एन्ड रेटिनल सेवाएं, नेत्र बैंक, हड्डी बैंक तथा ऑर्गन रीप्लान्टेशन केन्द्र तथा ट्रॉन्सफ्यूशन मेडिसिन विभाग की संस्थापन आदि को शामिलकर ऑर्गान रिट्रवल एवं बैंकिन्ग ऑर्गानाइज़ेशन (ओ.आर.बी.ओ) रू.50 करोड़ की लागत में शुरू करने की योजना है।

 

  • वर्तमान क्षेत्रीय कैंसर केन्द्र जो पुदुच्चेरी एवं पडोसी राज्यों से आए हुए रोगियों को गढि़ में सहायता प्रदान कर सबसे महंगी सेवाओं और दवाओं को निःशुल्क रूप में प्रदान किये जाते हैं और स्टेट ऑफ आर्ट मेडिकल, एक्युप्मेन्ट की खरीद एवं कन्सोलिडेशन ऑफ मेडिकल, सर्जिकल, अर्बुद चिकित्साएं और शैय्याओं की संख्या को वृद्धिकरण में कार्य करने के लिए 30 करोड़ रूपये का खर्च की जाएगी।

 

  • हर एक केन्द्र के लिए 10 करोड़ रूपये की खर्च कर मानसिक बीमारियों का केन्द्र एवं रेस्पिरेटरी डायग्नोस्टिक तथा इन्टरवेंशनल लॉबोरटरी का संस्थापन की जाएगी। 50 करोड रूपए की खर्च से बी.एस.एल.3 + सुविधाएं, एन्टी माईक्रोबियल रेस्सिटेन्स केन्द्र तथा हेपाटाइटिस वाईरस केन्द्र, न्यूरो वाइरोलॉजी, न्यूरो परासाइटोलॉजी, अतिसार रोगों एवं अनअरबिक बैक्टिरीयोलॉजी केन्द्र की संस्थापन के लिए वर्तमान प्रयोगशाला का विस्तार किया जाएगा।

 

  • अनुसंधान
  • एप्लाइड बेसिक मेडिकल साइन्स सेन्टर की संस्थापना से अनुसंधान के क्षेत्र में अपना स्थान सुदृढ़ बनाना जिपमेर का उद्देश्य है। आणविक जीव विज्ञान, सिग्नल ट्रॉन्सडॅक्शन, इन्ट्रा सेल्लुलर पैथवेस, नॉनो प्रौद्योगिकी, इन्स्ट्रुमेन्टेशन प्रौद्योगिकी, न्यूरल नेटवर्क, प्रोबॉयोटिक्स, प्रि-बॉयोटिक्स, आदि जैसे पाठ्यक्रमों की शुरूआत से आशा करते हैं कि हम आणविक स्तर पर सीमान्त खोज़ करने के सक्षम होंगें। एम.ए.आर.सी. के विस्तार के साथ, कैंसर पर विशेष ध्यान जिनेटिक बीमारियों, स्टेम सेल अनुसंधान एवं पुनर्जनन चिकित्सा को भी प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए बी.एस.एल., 3 टेस्टिंग सुविधओं के साथ पशु हाउस की आधुनिकीकरण और विस्तार की आवश्यकता है, इस को कार्यान्वित करने का प्रस्ताव जारी है। जिपमेर में ट्रॉन्सलेशनल अनुसंधान केन्द्र की स्थापना से बेन्च एन्ड बेडसाइड की दूरी को कम कर सकते हैं। औषध परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना से रोगियों को दिये जानेवाले औषधों की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित कर सकते है। इन सब के लिए कुल 140 करोड रूपए का खर्च किया जाएगा।

 

  • छात्र/संकाय/कर्मचारियों के कल्याण/मनोरंजन की सुविधाएं, केन्द्रीय कैंटीन, निदेशक का बंगला, संकायों का क्वार्टर्स, बहुमंजिला पार्किंग सुविधाएं, और 110 के.वी. स्टेशन की संस्थापन से विद्युत शक्ति की आपूर्ति को बढाने का कार्य जैसे कैंपस विकासोन्मुख कार्यों के लिए 140 करोड रूपए की व्यय होगा। 12 वें पंचवर्षीय योजना में इसका कुल परिव्यय 1005 करोड रूपए हैं।

 

http://www.jipmer.edu.in/हमारे बारे में/सामान्‍य सूचना/जिपमेर–के बारे में/

जिपमेर के बारे में

 

  • जवाहरलाल स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (जिपमेर), पुदुच्चेरी वर्ष 1956 से भारत सरकार के अधीन भारत के महत्वपूर्ण आयुर्विज्ञान संस्थानों में एक है। 195 एकड़ में फैले हुए यह कैंपस, पुदुच्चेरी (पहले पांडिच्चेरी) के शहरीय क्षेत्र में स्थित जिपमेर चेन्नै से सड़क से 170 किलोमीटर दूरी पर है।

 

  • संसद में पारित एक अधिनियम याने जिपमेर, पुदुच्चेरी, अधिनियम 2008 के तहत जिपमेर को एक ‘‘राष्ट्रीय महत्व संस्थान‘‘ के रूप में घोषित किया गया। दिनांक 14.07.2008 को इस अधिनियम को लागू करने के लिए राजपत्र में इस की एक प्रति अधिसूचित किया गया। इसके पहले यह संस्थान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्यरत है।

 

  • उपर्युक्ति अधिनियम के धारा 23 व 24 के अधीनस्थ इस संस्थान को चिकित्सा उपाधियाँ/डिप्लोमा देने की अधिकार है। जो भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद भारतीय नर्सिंग परिषद एवं भारतीय दन्त चिकित्सा परिषद के संबंधित शासी अधिनियमों की अनुसूची में शामिल किया जाना आवश्यक है। जो भारत के मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों के समतुल्य उपाधि के बराबर माना जाता है।

 

  • 1500 शैय्याओं एवं नर्सिंग महाविद्यालय सहित जिपमेर  चिकित्सालय द्वारा स्नातकपूर्व (यू.जी.), स्नातकोत्तर (पी.जी.) एवं अति विशिष्टता पाठ्यक्रमों में आयुर्विज्ञान प्रशिक्षण प्रदान किये जाते हैं। एम.बी.बी.एस., बी.एससी., एम.एससी., एम.डी., एम.एस., स्नातक पाठ्यक्रमों 32 विभिन्न विषयों में संचालित किये जाते है। अतिविशिष्टता विभाग जैसे हृदय रोग विज्ञान, तंत्रिका विज्ञान, हृदय वक्ष शल्य चिकित्सा, तंत्रिका शल्य चिकित्सा, यूरोलॉजी एवं नवजात विज्ञान, क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी, क्लिनिकल फॉर्मोकोलॉजी, क्लिनिकल हिमाटोलॉजी तथा शल्यक जठरान्त्ररोग विज्ञान विभागों में भी डी.एम./एम.सीएच. पाठ्यक्रम चलाये जाते हैं। फेलोशिप पाठ्यक्रम चार विषयों प्रदान किये जाते हैं । पूर्णःकालिक पी.एचडी. कार्यक्रम चार विषयो में भी प्रदान किये जाते हैं।

 

  • जिपमेर का मुख्य उद्देश्य हैं कि शिक्षण एवं अनुसंधान क्षेत्र में चिकित्सा संकायों द्वारा जिपमेर में उच्च गुणवत्ता का माहौल उपलब्ध कराते हुए जिपमेर में उपाधियों प्रदान करना। जिपमेर में एम.बी.बी.एस. का शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्य मुख्यतः स्वास्थ्य में सुधार,रोगों की रोकथाम और इलाज़ के रूप में मूलभूत समझ पर केन्द्रित है। सभी आयुर्विज्ञान के स्नातकों को भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (एम.सी.आई.) द्वारा निर्धारित केन्द्रबिन्दु के निष्कर्षों का पालन सुनिश्चित करना है।